छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के दल्लीराजहरा में मां भवानी का एक अनोखा दरबार स्थित है. यहां सालभर मंदिर के गर्भगृह में जल प्रवाहित होता रहता है. मंदिर समिति का मानना है कि यह जल कई किलोमीटर दूर बस्तर जिले के खंडी घाट में स्थित सोना दाई मंदिर के पवित्र कुंड से आ रहा है. इस विश्वास के पीछे कई कहानियां और लोककथाएं प्रचलित हैं, जो स्थानीय आस्था को और भी गहरा बनाती हैं. मंदिर समिति के संरक्षक रमेश मित्तल बताते हैं कि इन मान्यताओं की पुष्टि के लिए कुछ साल पहले इस जल का वैज्ञानिक परीक्षण भी कराया गया था.
रमेश मित्तल का कहना है कि जांच में जल का पीएच मान लगभग 7 और टीडीएस स्तर 70 से 72 के बीच पाया गया. दल्लीराजहरा को लोह नगरी कहा जाता है जबकि यहां के पानी में आयरन की मात्रा बिल्कुल भी नहीं पाया जाता. लौह अयस्क और खदानों से घिरा हुआ क्षेत्र होने के कारण राजहरा के किसी भी बोरवेल में इतना शुद्ध जल नहीं मिलता. ऐसे में इतना शुद्ध जल मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं.
मंदिर से जुड़ी है अनोखी मान्यता
मंदिर समिति के संरक्षक रमेश मित्तल ने बताया की एक पुरानी मान्यता के अनुसार, कभी सोनादाई मंदिर के कुंड में गिरा एक बैंस का बच्चा राजहरा में बहते झरने से बाहर निकला था. यह जल खंडी घाट की पहाड़ियों से होते हुए अनेक औषधीय पेड़ों की जड़ों को छूकर मंदिर तक पहुंचता है. इसी कारण यह पानी बेहद शुद्ध और औषधीय गुणों से युक्त माना जाता है.