रायपुर। राजधानी से सटे नकटी गांव में विस्थापन के बाद बेघर हुए प्रभावितों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जिला प्रशासन द्वारा नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में शिफ्ट किए गए कई परिवार अब वापस अपने गांव लौटने लगे हैं। मूलभूत सुविधाओं की कमी और तंग कमरों से परेशान होकर लोग एक बार फिर अपना बोरिया-बिस्तर समेट रहे हैं।
सुविधाओं के अभाव में पलायन को मजबूर
जब मीडिया की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो सेक्टर-30 के आवासों के बाहर भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला। प्रभावित परिवार अपनी चारपाई, बर्तन और अन्य सामान गाड़ियों में लोड कर रहे थे। विस्थापितों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें जो फ्लैट दिए हैं, वे बेहद छोटे हैं। इसके अलावा वहां बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भारी किल्लत है, जिसके कारण वहां रहना नामुमकिन हो गया है।
प्रभावित का आरोप, दबाव में बनवाया गया पॉजिटिव वीडियो
इस पूरी कार्रवाई के बीच प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में नजर आए प्रभावित राजकुमार यादव ने मीडिया के सामने एक चौंकाने वाला खुलासा किया।
राजकुमार ने आरोप लगाते हुए कहा मुझसे दबाव बनाकर वह पॉजिटिव वीडियो बनवाया गया था। डर के मारे मैंने वीडियो में सभी सुविधाएं मिलने की बात कह दी थी, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। वहां कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए अब मेरा परिवार यह आवास छोड़कर वापस अपने गांव नकटी लौट रहा है।
अफसरों का दावा-सब कुछ नियमानुसार
एक तरफ जहां ग्रामीण अपनी आपबीती सुनाते हुए प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारियों का रुख अब भी अड़ियल बना हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि विस्थापन और आवास आवंटन की यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के मुताबिक की गई है और प्रभावितों को नियमानुसार ही सुविधाएं दी जा रही हैं।
फिलहाल, अधिकारियों के दावों और ग्रामीणों की जमीनी हकीकत के बीच नकटी गांव के ये विस्थापित परिवार एक बार फिर बेघर होकर अपनों के बीच लौटने को मजबूर हैं।






