नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने जब से यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लगाने का फैसला किया है, तभी से इसका विरोध शुरू हो गया है. उपभोक्ताओं के मन में इसे लेकर शंका और सवाल तो है ही, दुकानदारों ने इसका खुलकर विरोध भी शुरू कर दिया है. इसी विरोध के कारण 15 अक्टूबर से यूपीआई पर एमडीआर लगाए जाने पर भी सवाल उठने लगे हैं और यह क्लीयर नहीं हो रहा कि इस शुल्क को लागू किया जाएगा या नहीं. सोशल मीडिया सहित तमाम प्लेटफॉर्म पर 15 अक्टूबर से एमडीआर लगाए जाने पर सवाल उठाए जा रहे. अब इस पर स्थिति क्लीयर करने के लिए एनपीसीआई ने 9 अक्टूबर को बैठक बुलाई है.
मनीकंट्रोल के हवाले से सूत्रों का कहना है कि एनपीसीआई ने 9 अक्टूबर, शुक्रवार को यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक बुलाई है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि 15 अक्टूबर से यूपीआई पर एमडीआर लगाया जाएगा या नहीं. सूत्रों का कहना है कि कमेटी की बैठक फर्स्ट हाफ में हो जाएगी और 1 से 2 बजे तक यूपीआई पर एमडीआर लगाने के फैसले को टाला भी जा सकता है. मनीकंट्रोल ने 8 अक्टूबर को ही बता दिया था कि एनपीसीआई एमडीआर लगाने के फैसले को जनवरी, 2027 तक टाल सकता है. इससे पहले एनपीसीआई ने 2 हजार से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर 0.40 फीसदी एमडीआर लगाने का ऐलान किया था.
एनपीसीआई ही करता है यूपीआई का प्रबंधन
देश के सबसे बड़े भुगतान प्लेटफॉर्म यूपीआई का प्रबंधन एनपीसीआई ही करता है. सूत्रों का कहना है कि एनपीसीआई ने एमडीआर को टालने का विचार कारोबारी संगठनों के विरोध, फिनटेक और पेमेंट कंपिनयों की गुहार के बाद किया है. इन दोनों ही सेक्टर्स ने एमडीआर को टाले जाने की गुहार लगाई थी. उनका कहना था कि त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं के सेंटिमेंट को देखते हुए अभी इस फैसले को टाल दिया जाना चाहिए. इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि फरवरी, 2027 तक यूपीआई पर एमडीआर लगाए जाने का फैसला टाला जा सकता है.
देश के सबसे बड़े भुगतान प्लेटफॉर्म यूपीआई का प्रबंधन एनपीसीआई ही करता है. सूत्रों का कहना है कि एनपीसीआई ने एमडीआर को टालने का विचार कारोबारी संगठनों के विरोध, फिनटेक और पेमेंट कंपिनयों की गुहार के बाद किया है. इन दोनों ही सेक्टर्स ने एमडीआर को टाले जाने की गुहार लगाई थी. उनका कहना था कि त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं के सेंटिमेंट को देखते हुए अभी इस फैसले को टाल दिया जाना चाहिए. इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि फरवरी, 2027 तक यूपीआई पर एमडीआर लगाए जाने का फैसला टाला जा सकता है.
कितना लगाया है एमडीआर
एनपीसीआई ने पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में 2 हजार से ज्यादा वैल्यू वाले यूपीआई भुगतान पर 0.4 फीसदी मर्चेंट रेट डिस्काउंट यानी एमडीआर लगाने का फैसला किया था. इसका मतलब है कि 2 हजार की रकम पर 8 रुपये और 10 हजार की रकम पर 40 रुपये का एमडीआर वसूला जाना है. यह शुल्क 15 अक्टूबर से लागू होना है, लेकिन अब इसे टाले जाने की चर्चा जोरों पर चल रही है.
एनपीसीआई ने पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में 2 हजार से ज्यादा वैल्यू वाले यूपीआई भुगतान पर 0.4 फीसदी मर्चेंट रेट डिस्काउंट यानी एमडीआर लगाने का फैसला किया था. इसका मतलब है कि 2 हजार की रकम पर 8 रुपये और 10 हजार की रकम पर 40 रुपये का एमडीआर वसूला जाना है. यह शुल्क 15 अक्टूबर से लागू होना है, लेकिन अब इसे टाले जाने की चर्चा जोरों पर चल रही है.
कार्ड से ज्यादा है यूपीआई की अहमियत
डिजिटल भुगतान व्यवस्था में वैसे तो कार्ड भी शामिल है, लेकिन यूपीआई का इस्तेमाल कहीं ज्यादा व्यापक और आसान हो गया है. आरबीआई ने लोन और ईएमआई चुकाने के लिए क्रेडिट कार्ड को अभी तक इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी है, लेकिन इसके लिए यूपीआई का इस्तेमाल किया जा सकता है. यही वजह है कि यूपीआई का दायरा ज्यादा व्यापक हो गया है और उपभोक्ताओं को भी इसमें आसानी होती है.
डिजिटल भुगतान व्यवस्था में वैसे तो कार्ड भी शामिल है, लेकिन यूपीआई का इस्तेमाल कहीं ज्यादा व्यापक और आसान हो गया है. आरबीआई ने लोन और ईएमआई चुकाने के लिए क्रेडिट कार्ड को अभी तक इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी है, लेकिन इसके लिए यूपीआई का इस्तेमाल किया जा सकता है. यही वजह है कि यूपीआई का दायरा ज्यादा व्यापक हो गया है और उपभोक्ताओं को भी इसमें आसानी होती है.






