अमेरिका में 3 नवंबर को 2026 के मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग शुरू को चुकी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के ठीक दो साल पूरे होने पर हो रहे ये चुनाव अमेरिकी सत्ता का भविष्य तय करेंगे. ये चुनाव सिर्फ संसद के सदस्यों को चुनने का नहीं है, बल्कि ये फैसला करेगा कि आने वाले दो सालों तक व्हाइट हाउस में बैठे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास कितनी ताकत बचेगी. अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रंप अपनी नीतियां लागू कर पाएंगे या फिर विपक्ष उनके हर रास्ते में रोड़ा अटकाएगा?
क्या होते हैं मिडटर्म चुनाव और ये राष्ट्रपति के लिए क्यों इतने अहम हैं?
‘मिडटर्म’ चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक बीच में होते हैं. इस बार 2026 में अमेरिकी जनता राष्ट्रपति का चुनाव नहीं कर रही है, बल्कि वो अमेरिकी संसद और राज्यों के गवर्नरों को चुनने के लिए वोट डाल रही है. अमेरिकी संसद के दो सदन हैं, जहां पावर का असली बैलेंस तय होता है.
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (सदन): यहां कुल 435 सीटें हैं और सभी 435 सीटों पर वोटिंग हो रही है. बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 218 सीटों की जरूरत होती है.
सीनेट (उच्च सदन): सीनेट में कुल 100 सीटें होती हैं, जिनमें से 35 सीटों पर इस बार मुकाबला है. फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 45 सीटें और 2 निर्दलीय हैं.
इतिहास गवाह है कि मिडटर्म चुनाव हमेशा सत्ताधारी राष्ट्रपति के लिए सबसे कठिन परीक्षा होते हैं. पिछले 22 में से 20 मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है. इसे राष्ट्रपति के काम पर जनता का ‘रिपोर्ट कार्ड’ माना जाता है.
डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत: अगर अमेरिकी जनता महंगाई और ट्रंप प्रशासन की कुछ सख्त नीतियों, जैसे ईरान जंग, आयात शुल्क और स्थानीय स्तर पर एआई डेटा सेंटर्स का विरोध से तंग आकर डेमोक्रेट्स के पक्ष में वोट देती है, तो डेमोक्रेट्स हाउस और सीनेट दोनों पर कब्जा कर सकते हैं. ये ट्रंप के लिए सबसे बड़ा झटका होगा. डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन की नीतियों, फैसलों और उनके अधिकारियों की आक्रामक जांच शुरू कर देंगे. ट्रंप के लिए कोई भी नया बजट या कानून पास कराना नामुमकिन हो जाएगा और यहां तक कि इंपीचमेंट का खतरा भी मंडराने लगेगा.
मिला-जुला नतीजा : अगर डेमोक्रेट्स सिर्फ हाउस में मामूली बहुमत हासिल कर पाते हैं और सीनेट पर रिपब्लिकन पार्टी अपना कब्जा बनाए रखती है. इससे वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की स्थिति पैदा हो जाएगी. कोई भी बड़ा कानून पास कराने के लिए दोनों पार्टियों को आपस में खींचतान और सौदेबाजी करनी पड़ेगी.
रिपब्लिकन पार्टी की पकड़ बरकरार : अगर सर्वे और अनुमानों को झूठा साबिक करते हुए रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाने में कामयाब रहती है. डोनाल्ड ट्रंप के लिए अगले दो साल बेहद आसान हो जाएंगे. वे अपनी घरेलू और विदेश नीतियों को बिना किसी संसदीय रुकावट के आगे बढ़ा सकेंगे. इससे 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी उनकी पार्टी बेहद मजबूत स्थिति में आ जाएगी.
अगर डेमोक्रेट्स जीते, तो ट्रंप बनेंगे ‘मिस्टर वीटो’
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही साफ कर दिया है कि अगर संसद पर विरोधी पार्टी का कब्जा हो जाता है, तो वे चुपचाप हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेंगे.
हाल ही में मिरांडा डिवाइन के पॉडकास्ट ‘पॉड फोर्स वन’ में बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर रिपब्लिकन पार्टी चुनाव हार जाती है, तो वो ‘मिस्टर वीटो’ बन जाएंगे.
वीटो पावर क्या है : अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को ये अधिकार देता है कि संसद द्वारा पास किए गए किसी भी बिल को वो खारिज कर सकता है.
ट्रंप की रणनीति: ट्रंप ने साफ कहा, ‘मैं उन्हें काम बिगाड़ने नहीं दूंगा. वो बिल पास करके मेरे पास भेजेंगे, मैं उन पर वीटो लगा दूंगा. एक-दो महीने तक जब उनके सारे बिल रद्द होते रहेंगे, तो वे खुद बातचीत की मेज पर आएंगे और समझौता करेंगे’.
संसद का पलटवार: हालांकि, अगर संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से किसी बिल को दोबारा पास कर दिया जाए, तो राष्ट्रपति का वीटो भी बेअसर हो जाता है, लेकिन ऐसा होना बेहद दुर्लभ होता है.
कौन-कौन से बड़े मुद्दे तय कर रहे हैं चुनाव का रुख?
बढ़ती महंगाई और लागत: 34% मतदाताओं के लिए रहन-सहन का खर्च और महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा है.
ईरान के साथ युद्ध और विदेश नीति: ईरान के साथ बढ़ते तनाव और ट्रंप के ट्रेड टैरिफ फैसलों का जनता पर सीधा असर पड़ा है.
एआई डेटा सेंटर्स का विरोध: अमेरिका में टेक कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे एआई (AI) डेटा सेंटर्स को लेकर 66% जनता विरोध में है, जिसका असर कई राज्यों के चुनाव पर दिख रहा है.
कानूनी लड़ाई और फर्जी वोटिंग विवाद: कई राज्यों जैसे कैलिफोर्निया में मेल-इन बैलेट और मतदाता सूची को लेकर सरकार और कोर्ट के बीच खींचतान चल रही है.
2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर इसका क्या असर पड़ेगा?
भले ही इस चुनाव में राष्ट्रपति का पद दांव पर न हो, लेकिन 2026 के मिडटर्म नतीजे सीधे 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की नींव रखेंगे.
अगर डेमोक्रेट्स जीतते हैं, तो 2028 के लिए उनकी दावेदारी बहुत मजबूत हो जाएगी और वे ट्रंप प्रशासन को हर मोर्चे पर घेरेंगे.
अगर रिपब्लिकन पार्टी जीतती है, तो ट्रंप अपने बचे हुए कार्यकाल को अपनी शर्तों पर चलाएंगे और 2028 के लिए अपनी विरासत को मजबूत करेंगे.
फिलहाल 5 करोड़ से ज्यादा अमेरिकियों के फौसले और 3 नवंबर को होने वाली अंतिम वोटिंग के बाद ही साफ होगा कि ट्रंप के हाथ में कितनी पावर बचेगी और कितनी छीन ली जाएगी?






