राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल को घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ्स के बाद से अमेरिका के शेयर बाजारों में कोहराम मचा हुआ है. शुक्रवार को भी अमेरिकी शेयर बाजार औंधे मुंह गिरा. एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के ‘लिबरेशन डे टैरिफ्स’ के बाद बाजार में आई गिरावट से निवेशकों को करीब 6 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 500 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान हो चुका है. यह गिरावट कोविड काल के बाद सबसे भयानक साप्ताहिक गिरावट है. लेकिन, बाजार में आए भूचाल से डोनाल्ड ट्रंप को फर्क नहीं पड़ता दिख रहा है. वे अपने फैसले पर अडिग हैं. उन्होंने इस आर्थिक तबाही को नजरअंदाज करते हुए ट्रूथ सोशल पर इसे “अमीर बनने का सुनहरा मौका” बताया. उन्होंने लिखा, “जो निवेशक अमेरिका में भारी निवेश कर रहे हैं, उन्हें बता दूं कि मेरी नीतियां कभी नहीं बदलेंगी. यह अमीर बनने का बेहतरीन समय है—पहले से भी ज्यादा अमीर बनने का.”
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को टैरिफ से कैसे अमीर बनाएंगे, उनको छोड़कर ये किसी को समझ नहीं आ रहा है. दिग्गज फाइनेंशियल फर्म्स जेपी मॉर्गन ने भी अब वैश्विक मंदी की आशंका को 40 फीसदी से बढाकर 60 फीसदी कर दिया है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, जेपी मॉर्गन के चीफ इकोनॉमिस्ट ब्रूस कासमैन ने अपने रिपोर्ट का नाम “There Will Be Blood”, यानी ‘अब खून बहेगा’ रखा है. उनका कहना है कि टैरिफ से न केवल व्यापार में प्रतिशोध देखने को मिलेगा, बल्कि इससे अमेरिका की कारोबारी भावनाएं कमजोर होंगी और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी गहरा असर पड़ेगा. ब्रूस कासमैन ने कहा कि अमेरिका की नीतियां अब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई हैं. यदि यही नीतियां जारी रहीं, तो अमेरिका के साथ-साथ दुनिया भी आर्थिक संकट की चपेट में आ सकती है.
व्यापार और उपभोक्ताओं पर प्रभाव
कासमैन की रिपोर्ट में इन टैरिफ्स को कर वृद्धि के समान बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, इनसे अमेरिका में आयातित सामानों पर लगने वाला कुल टैक्स रेट 22 प्रतिशत अंक तक बढ़ गया है, जिससे यह लगभग 24% तक पहुंच गया है. इसका सीधा असर बिजनेस कॉस्ट और कंज्यूमर प्राइसिंग पर पड़ेगा. कंपनियों के लिए लागत बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को ज्यादा पैसे चुकाने होंगे, जिससे खर्च और निवेश में कमी आ सकती है और अर्थव्यवस्था में सिकुड़न आ सकती है.