छत्तीसगढ़

रायपुर की फैक्ट्री में ब्लास्ट : 3 मजदूरों की मौत, 200 मीटर दूर तक बिखरे चिथड़े 

रायपुर। राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र के बेंद्री स्थित थ्रीडी इनोवेशन फैक्ट्री में मंगलवार शाम को एक बेहद  दर्दनाक हादसा हो गया। फैक्ट्री के भीतर गैस सिलेंडर बदलते समय हुए जोरदार धमाके में तीन मजदूरों की मौत हो गई। विस्फोट इतना भयानक था कि उसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी और मृत मजदूरों के शरीर के चिथड़े घटनास्थल से करीब 200 मीटर की दूरी तक जाकर बिखरे।

सिलेंडर बदलते समय हुआ हादसा, तबाही का मंजर

मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस वक्त हुआ जब प्लांट की टेपिंग यूनिट में ऑक्सीजन सिलेंडर बदला जा रहा था। धमाका होते ही चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।

हादसे में मध्य प्रदेश के डिंडौरी निवासी लाल सिंह की मौके पर ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल कमल सिंह 25 वर्ष ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया।इस हादसे में एक नाबालिग श्रमिक अरुण पांडे की भी जान चली गई है।

विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस यूनिट में यह ब्लास्ट हुआ, वहां का नजारा बेहद खौफनाक था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और श्रम विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं और साक्ष्य जुटाने के साथ ही मामले की जांच में जुट गईं।

मजदूरों का आरोप : न ट्रेनिंग मिली थी, न ही सेफ्टी गियर

फैक्ट्री में काम करने वाले अन्य साथी मजदूरों ने प्रबंधन पर सुरक्षा में घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रमिकों का कहना है कि उन्हें बिना किसी तकनीकी प्रशिक्षण के सीधे खतरनाक भट्ठियों और गैस यूनिटों में काम पर झोंक दिया जाता था। फैक्ट्री में काम के दौरान बेहद जरूरी माने जाने वाले पर्याप्त सुरक्षा उपकरण भी प्रबंधन द्वारा उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब यह धमाका हुआ, तब टेपिंग यूनिट से कुछ ही दूरी पर अन्य मजदूर खाना बना रहे थे, जो बाल-बाल बच गए। वर्तमान में पुलिस और श्रम विभाग की टीमें इस बात की गहन जांच कर रही हैं कि ब्लास्ट की मुख्य वजह क्या थी, क्या वहां सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा था, और सबसे संवेदनशील बात कि फैक्ट्री में नाबालिग बच्चे से मजदूरी क्यों कराई जा रही थी।

 पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान और राजनीतिक हलचल

हादसे के बाद कंपनी ने कमल सिंह और लाल सिंह के परिवार के लिए  21-21 लाख मुआवजे का ऐलान किया है। जबकि, नाबालिग अरुण पांडे के लिए 31 लाख मुआवजे का ऐलान किया है। इधर कांग्रेस ने घटना की जांच के लिए समिति बनाई है।

जांच समिति का गठन

इस बड़ी औद्योगिक दुर्घटना को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने घटना की जमीनी हकीकत, सुरक्षा में चूक और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से वस्तुस्थिति का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया है।

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