कभी पांचवीं तक पढ़ाई कर घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत कोईलार की शिमला राठिया आज आत्मविश्वास के साथ अपने फैसले ले रही हैं। महतारी वंदन योजना की 30 किस्तों से मिले आर्थिक संबल और बिहान से जुड़ाव ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। महतारी वंदन से मिली राशि का उपयोग शिमला ने केवल घरेलू जरूरतों में नहीं किया। उन्होंने करीब 10 हजार रुपये खर्च कर जेसीबी से खेत का समतलीकरण एवं सुधार कराया। खेत तैयार होने से अब बेहतर फसल उत्पादन और आय बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले रक्षाबंधन के लिए उन्होंने इसी आर्थिक संबल से भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीदने की तैयारी की है।
बिहान से जुड़ने के बाद शिमला के आत्मविश्वास में बड़ा बदलाव आया। समूह की गतिविधियों और आजीविका से जुड़े कार्यों ने उन्हें घर से बाहर निकलने और नए अनुभव हासिल करने का अवसर दिया। कभी अकेले बाहर निकलने में झिझकने वाली शिमला अब अपने काम के सिलसिले में बड़े शहरों तक अकेले आना-जाना कर लेती हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी अधूरी शिक्षा को भी आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वर्तमान में शिमला बीज राखी बनाने का कार्य कर रही हैं। पर्यावरण हितैषी राखियों की बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आमदनी हो रही है। बिहान से जुड़कर उन्होंने अपने हुनर को रोजगार से जोड़ा और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। शिमला राठिया कहती हैं, महतारी वंदन योजना की राशि से मैंने अपने खेत का काम करवाया है, ताकि फसल ज्यादा हो सके। बिहान से जुड़ने के बाद मेरा आत्मविश्वास बहुत बढ़ा है। अब मैं अपने काम के लिए अकेले बाहर भी आना-जाना कर लेती हूं। इसके लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी को हृदय से धन्यवाद देती हूं।






