छत्तीसगढ़

नक्सलियों की हथियार फैक्ट्री ध्वस्त : भारी मात्रा में राइफल, क्लेमोर माइंस और BGL लांचर जब्त

मोहला। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के अंतर्राज्यीय सीमावर्ती सुदूर वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन फाइनल स्ट्राइक  के तहत नक्सलियों के एक बड़े शस्त्रागार और हथियार बनाने वाली फैक्ट्री को ध्वस्त कर दिया है। सरेंडर कर चुके नक्सलियों से मिले पुख्ता इनपुट के बाद गढ़चिरौली पुलिस और बस्तर की डीआरजी टीम ने एक संयुक्त और बेहद गोपनीय अभियान चलाकर जमीन के नीचे छिपाकर रखे गये हथियारों और विस्फोटक सामग्रियों का भारी जखीरा बरामद किया है।

सरेंडर नक्सलियों के इनपुट पर ज्वाइंट ऑपरेशन

सुरक्षा अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में गढ़चिरौली पुलिस बल के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले खूंखार माओवादियों से गहन पूछताछ की गई थी। इस पूछताछ में नक्सलियों ने खुलासा किया कि नारायणपुर छत्तीसगढ़ से महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा के अंदर लगभग 7 किलोमीटर दूर घने जंगलों में हथियार निर्माण की एक गुप्त यूनिट और डंप मौजूद है।

सूचना पर तत्काल किया गया टास्क फोर्स का गठन

सूचना मिलते ही बिना वक्त गंवाए एक संयुक्त टास्क फोर्स का गठन किया गया। इस सर्च ऑपरेशन के लिए विशेष मिशन टीम C-60 की 4 इकाइयां, डीआरजी नारायणपुर की 1 टीम और बीडीडीएस (बम डिस्पोजल स्क्वाड) की 2 टीमें बनाई गई। इन सभी को तुरंत प्रभावित वन क्षेत्र के लिए रवाना किया गया। बीडीडीएस की टीमों ने जब मेटल डिटेक्टरों की मदद से सघन तलाशी ली, तो जमीन के नीचे दबाकर रखी गई पूरी हथियार फैक्ट्री और शस्त्रागार उजागर हो गया।

बरामद किए गए हथियार और सामग्री  

सुरक्षा बलों को मौके से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, विस्फोटक और कटर मशीनें मिली हैं, जिनमें  2 आईएनएसएएस राइफल, 2 सिंगल शॉट राइफल, एक 12 बोर बंदूक, SLR, .303 और 12 बोर राइफल के सैकड़ों कारतूस, 25 किलोग्राम आईईडी विस्फोटक, क्लेमोर माइन, 110 नग डेटोनेटर, कॉर्टेक्स वायर, 500 से अधिक बीजीएल सेल और लांचर, हथियार बनाने की मशीन और मोटर, ग्राइंडर मशीन, इन्वर्टर और बैटरी, सोलर प्लेट और बड़े तार के बंडल शामिल हैं।

चुनाव और नक्सल सप्ताह में बड़ी तबाही की थी साजिश

जांच में यह बात सामने आई है कि नक्सली अंतर्राज्यीय सीमा के इस सुदूर वन क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर यहां गोपनीय रूप से हथियार तैयार कर रहे थे। इन घातक सामग्रियों और बीजीएल बैरल ग्रेनेड लांचर सेल का उपयोग आगामी दिनों में नक्सल सप्ताह, चुनाव या किसी बड़े वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा बलों को एम्बुश घात लगाकर हमला में फंसाने और बड़ी विध्वंसकारी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाना था।

गढ़चिरौली में अंतिम सांसें गिन रहा माओवाद

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस इलाके में नक्सलियों का आधार अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। ऑपरेशन फाइनल स्ट्राइक के जरिए उनके इस मुख्य शस्त्रागार को नष्ट करना माओवादी आंदोलन की कमर तोड़ने जैसा है। इस बड़ी रिकवरी से सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है, जिससे भविष्य में होने वाले कई बड़े कूटनीतिक और जानलेवा हमलों को पहले ही टाल दिया गया है।

 

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