छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को मिलेगा 59 महीने का बकाया एरियर

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पेंशनभोगियों को बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने बढ़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच वित्तीय देनदारियों को लेकर चल रहे किसी भी विवाद या सहमति की कमी का असर पेंशनर्स के वैध अधिकारों पर नहीं पड़ सकता।

अदालत ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें सिंगल बेंच द्वारा एरियर भुगतान के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस फैसले के बाद अब प्रदेश के पेंशनभोगियों के लिए छठवें और सातवें वेतन आयोग के तहत लंबित कुल 59 महीनों के एरियर भुगतान का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करते समय पुराने पेंशनर्स के साथ भेदभाव किया।

सरकार ने छठवें वेतन आयोग के लाभ के लिए 1 सितंबर 2008 और सातवें वेतन आयोग के लिए 1 अप्रैल 2018 की कट-ऑफ तारीख तय कर दी थी। इस मनमानी तारीख के कारण बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशनर्स को क्रमशः 32 महीने और 27 महीने कुल 59 माह के एरियर से हाथ धोना पड़ा था।

कोर्ट में सरकार की दलीलें फेल

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बचाव करते हुए तर्क दिया था कि मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 के तहत किसी भी वित्तीय हिस्सेदारी के लिए मध्यप्रदेश सरकार की सहमति अनिवार्य है। सरकार का यह भी कहना था कि यह एक नीतिगत फैसला है, जिसमें अदालत को दखल नहीं देना चाहिए।

दूसरी तरफ, पेंशनर्स के वकीलों ने इस दलील का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार पहले ही यह साफ कर चुकी है कि पेंशनर्स के एरियर भुगतान के लिए पड़ोसी राज्य की सहमति लेना जरूरी नहीं है।

सिंगल बेंच के फैसले को रखा बरकरार

इससे पहले, इसी साल 1 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार के इस कट-ऑफ वाले आदेश को असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया था। सिंगल बेंच ने सरकार को 120 दिनों के भीतर सभी पेंशनर्स का एरियर भुगतान करने का आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि छत्तीसगढ़ सरकार भुगतान करने के बाद अपने हिस्से की राशि मध्य प्रदेश सरकार से वसूल सकती है।

राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी, जिसे अब मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

बुजुर्गों पर नहीं डाला जा सकता दो राज्यों के विवाद का बोझ

डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए टिप्पणी की, अदालत ने कहा- दो राज्यों के बीच चल रहे प्रशासनिक या वित्तीय विवाद का बोझ उन बुजुर्ग पेंशनर्स पर कतई नहीं डाला जा सकता, जिन्होंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्ष सरकारी सेवा में दिए हैं।

हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब छत्तीसगढ़ शासन को हजारों बुजुर्गों के हक का पैसा जल्द से जल्द रिलीज करना होगा, जिससे पेंशनभोगी समाज में खुशी की लहर है।

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