छत्तीसगढ़

करोड़ के दुर्ग विश्वविद्यालय की नई बिल्डिंग में भरा पानी : PWD की लापरवाही उजागर

दुर्ग-भिलाई। दुर्ग के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की पोटियाकला में लगभग 15 करोड़ की लागत से बनी नई प्रशासनिक बिल्डिंग पहली ही बारिश में पानी-पानी हो गई। लगातार हुई एक दिन की बारिश के बाद ही भवन के कमरों, गलियारों और बेसमेंट में पानी भर गया, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

3 साल पहले बनी बिल्डिंग, लेकिन अब तक नहीं हुआ हैंडओवर

हैरानी की बात यह है कि इस भवन का निर्माण पूरा हुए करीब 3 साल बीत चुके हैं, लेकिन PWD ने इसे अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन को हैंडओवर सौंपा नहीं किया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा कई बार पत्र लिखे जाने के बावजूद विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। कुछ समय पहले दुर्ग कलेक्टर ने भी भवन का निरीक्षण कर कई खामियां पकड़ी थीं और उन्हें सुधारने के निर्देश दिए थे, लेकिन उन निर्देशों को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

लिफ्ट बंद, सीढ़ियां टूटीं, पहली ही बारिश में खुली पोल

प्रशासनिक भवन के निर्माण पर 14.92 करोड़ खर्च हुए हैं, जबकि सड़क, ड्रेनेज, लिफ्ट और लैंडस्केपिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए 5 करोड़ अलग से आवंटित किए गए थे। इसके बावजूद ज़मीनी हकीकत बेहद खराब है। दीवारों पर सीपेज साफ देखी जा सकती है और दोनों लिफ्ट बंद पड़ी हैं, जिनके पास पानी भर गया है। मुख्य प्रवेश द्वार की सीढ़ियां अभी से टूटने लगी हैं और पार्किंग के शटर खराब हो रहे हैं। परिसर में खोदे गए 3 बोर में से 2 पहले ही दम तोड़ चुके हैं।

48 साल पुराने जर्जर भवन में चलने को मजबूर विश्वविद्यालय

नई बिल्डिंग के तैयार होने के बाद भी विश्वविद्यालय का पूरा प्रशासनिक काम आज भी 48 साल पुराने जर्जर भवन (पूर्व महिला कॉलेज) से चल रहा है। इस पुराने भवन की स्थिति इतनी खराब है कि कई बार छत के हिस्से गिर चुके हैं और बड़े हादसे टल चुके हैं। यहाँ उत्तर पुस्तिकाएं और जरूरी सरकारी दस्तावेज रखने तक की पर्याप्त जगह नहीं है। वहीं, बारिश के दिनों में यह पुराना परिसर भी जलभराव की चपेट में आ जाता है, जिससे कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

नई बिल्डिंग का पूरा लेखा-जोखा

यह भवन पोटियाकला में बना है, जिसका परिसर 40 एकड़ है, जहां 10 एकड़ में प्रशासनिक भवन बना है। जिसकी लागत 14.92 करोड़ है साथ ही 5 करोड़ सड़क, ड्रेनेज व अन्य कार्य के लिए मंजूर है| भवन निर्माण का भूमिपूजन 8 मार्च 2019 को हुआ था। और निर्माण कार्य 2021 में पूरा होना था। देरी पर 2023 में रूसा ने नोटिस दिया। 2024 में काम पूरा हुआ, पर अब तक हैंडओवर नहीं हुआ है|

Related Posts