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पश्चिम बंगाल में खेला : अब ममता के 21 सांसदों पर टूटने का खतरा ! सुखेंदु शेखर रे का इस्तीफा, शुभेंदु और भाजपा प्रभारी से की मुलाकात

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी बगावत अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है। 58 विधायकों के विद्रोह के बाद अब ममता बनर्जी के 21 सांसद भी पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। सोमवार दोपहर इन 21 बागी सांसदों ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर एक बेहद अहम बैठक की।

इस बैठक के दौरान बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी सांसदों से मिलने पहुंचे। बागी सांसदों में से कुछ प्रमुख नाम काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी हैं। लोकसभा में TMC के कुल 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं।

वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे का राज्यसभा से इस्तीफा,  ममता सरकार पर बोला हमला

इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बीच TMC के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा सांसद पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया है। सुखेंदु का कार्यकाल 2029 तक था, और अब इस सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। सुखेंदु शेखर ने अपने इस्तीफे में ममता बनर्जी के नेतृत्व पर तीखे सवाल उठाए और भाजपा सरकार की तारीफ की।

इस्तीफे में सुखेंदु शेखर ने लिखीं ये 5 बड़ी बातें

1  ममता सरकार का 15 साल का शासन बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून-व्यवस्था व रोजगार के मोर्चे पर बुरी तरह नाकाम रहा।

2 इतिहास में पहली बार बंगाल के लोगों ने भाजपा के पक्ष में भारी जनादेश दिया है। यह जनादेश तृणमूल कांग्रेस के अराजक शासन को खत्म करने के लिए था।

3 पार्टी उस तरीके से नहीं चल रही थी, जैसे चलनी चाहिए। नेताओं को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति नहीं थी और कई बार महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी राय तक नहीं ली जाती थी।

4 पार्टी के भीतर ऐसे हालात लंबे समय से चल रहे थे। चुनाव हारने के बाद भी ममता बनर्जी ने न तो आत्ममंथन किया और न ही हार के कारण जानने की कोशिश की।

5 सुखेंदु ने नई चुनी गई भाजपा सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि वे अपने घोषणापत्र के अनुसार राज्य के विकास और पुनर्निर्माण के लिए तेजी से कदम उठा रहे हैं।

 

विधायकों के बाद अब सांसदों की बगावत से संकट में TMC

बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है। 3 जून को ही बंगाल के 80 में से 58 TMC विधायकों ने अलग गुट बना लिया था, जिसके नेता ऋतब्रत बनर्जी चुने गए थे।

अब सांसदों की बगावत पर प्रतिक्रिया देते हुए बागी विधायक गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा- “सुखेंदु शेखर रे ने जो बातें कही हैं, वे काफी हद तक सही हैं। यह सिर्फ उनकी निजी बात नहीं, बल्कि पार्टी के अधिकांश नेताओं की भावना है। संसद कोई क्विज खेलने की जगह नहीं है, वहां गंभीरता से काम होना चाहिए।”

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