नई दिल्ली । NEET और CBSE परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर देश में सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। अब सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। रविवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए अभिजीत ने अल्टीमेटम दिया कि यदि 13 जून तक देश के शिक्षा मंत्री अपना इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वह खुद अलग-अलग राज्यों और शहरों में जाकर प्रदर्शन करेंगे।
अभिजीत ने चेतावनी दी कि इसके बाद भी यदि मांग पूरी नहीं हुई, तो देशभर के छात्र एक बार फिर दिल्ली कूच करेंगे और शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इससे पहले 6 जून को भी CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन के लिए अभिजीत विशेष रूप से अमेरिका से भारत आए हैं।
हिंदू-मुस्लिम राजनीति से रोजगार नहीं मिलेगा
रविवार शाम महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित अपने गृह नगर पहुंचे अभिजीत दीपके ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। देश की राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा- पिछले 10-12 सालों से देश की राजनीति सिर्फ हिंदू-मुस्लिम मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। देश के युवाओं को यह समझना होगा कि इन मुद्दों से रोजगार नहीं मिलने वाला है।
डिजिटल सुनामी : 24 घंटे में बढ़े 6 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स
सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी को युवाओं का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद महज 24 घंटे के भीतर पार्टी के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या 2.21 करोड़ से बढ़कर 2.27 करोड़ (6 लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी) हो गई। वहीं, X (ट्विटर) पर भी उनके 2.70 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं।
CJP के सामने हैं 3 बड़ी राजनीतिक चुनौतियां
भले ही पार्टी को डिजिटल स्पेस में भारी सफलता मिल रही हो, लेकिन जानकारों के मुताबिक चुनावी राजनीति में टिकने के लिए अभिजीत के सामने ये 3 बड़ी चुनौतियां हैं:
1.फॉलोअर्स को वोटर्स में बदलना- इंस्टाग्राम पर करोड़ों की सेना होने के बावजूद जंतर-मंतर पर उम्मीद से कम भीड़ जुटी। पार्टी के पास राजनीतिक अनुभव और जमीनी स्तर पर ब्लॉक या जिला कमेटियों का अभाव है। सवाल यही है कि क्या यह ‘क्लिक एक्टिविज्म’ वोट बैंक में बदल पाएगा?
2.अन्ना आंदोलन जैसा कैडर न होना- 2011 के ऐतिहासिक अन्ना आंदोलन की सफलता के पीछे जमीन पर काम करने वाले कई संगठनों का मजबूत कैडर था। CJP का पूरा आधार वर्चुअल (डिजिटल) है, जिसके पास फिलहाल बूथ मैनेजमेंट की कोई समझ नहीं है।
3.सिंगल पॉइंट एजेंडे की कमी- किसी भी बड़े आंदोलन की सफलता के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य (जैसे अन्ना आंदोलन के समय ‘लोकपाल बिल’) जरूरी है। CJP के मंच पर लोग नीट परीक्षा के अलावा मणिपुर हिंसा, टैक्स, पानी के संकट और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अलग-अलग मुद्दों पर बात कर रहे हैं, जिससे आंदोलन बिखरा हुआ नजर आ रहा है।
CJI सूर्यकांत के ‘कॉकरोच’ वाले बयान से हुआ था पार्टी का जन्म
इस अनोखी पार्टी के गठन की कहानी न्यायपालिका के एक बयान से जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच एक वकील की याचिका पर 15 मई को सुनवाई कर रही थी। इस दौरान CJI सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं पर तल्ख टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ (परजीवी) कह दिया था, जो बाद में मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं। इस बयान से नाराज होकर अमेरिका में रह रहे अभिजीत दीपके ने अगले ही दिन 16 मई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की नींव रख दी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर CJP द्वारा चलाई गई ऑनलाइन पिटीशन पर अब तक 8 लाख से ज्यादा लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं।






