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ममता को महाझटका: 4 दिन में तीसरे TMC राज्यसभा सांसद का इस्तीफा, बंगाल से दिल्ली तक भारी बगावत

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस TMC में इस वक्त अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक भूकंप आया हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है। गुरुवार को टीएमसी के एक और राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले 4 दिनों के भीतर ममता बनर्जी का साथ छोड़ने वाले वे तीसरे राज्यसभा सांसद हैं। इस सिलसिलेवार इस्तीफे के बाद अब राज्यसभा में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर महज 10 रह गई है।

दिन, 3 बड़े इस्तीफे : कब-किसने छोड़ा साथ ?

ममता बनर्जी के लिए दिल्ली के गलियारों से लगातार बुरी खबरें आ रही हैं। पिछले चार दिनों का घटनाक्रम में 11 जून को  राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने इस्तीफा दिया। 10 जून को  तेजतर्रार महिला नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और पद से रिजाइन किया। 8 जून को टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने सदस्यता और पार्टी दोनों को अलविदा कह दिया।

आंकड़ों में समझिए टीएमसी की बड़ी टूट

ममता बनर्जी की पार्टी में सिर्फ राज्यसभा ही नहीं, बल्कि लोकसभा और बंगाल विधानसभा में भी दो-फाड़ हो चुकी है। अब तक के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं:

सदन कुल सांसद/विधायक बगावत करने वाले अब ममता के साथ बचे
लोकसभा 28 20 8
राज्यसभा 13 3 10
बंगाल विधानसभा 80 58 (दावा 64 का) 22

संसद के दोनों सदनों (लोकसभा + राज्यसभा) को मिलाकर टीएमसी के कुल 41 सांसदों में से 23 सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़ चुके हैं।

विधानसभा में अलग गुट , ऋतब्रत बनर्जी बन सकते हैं विपक्ष के नेता

बंगाल की राजनीति में असली घमासान विधानसभा के भीतर छिड़ा हुआ है। टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने बगावत करते हुए अपना एक अलग गुट बना लिया है। इन बागी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर (अध्यक्ष) को पत्र सौंपकर ऋतब्रत बनर्जी को सदन में विपक्ष का नेता बनाने की मांग की है।

बुधवार को मीडिया से बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया- हमारे पास इस समय कुल 64 विधायकों का समर्थन है। अभी 58 ने पत्र दिया है, बाकी बचे 6 विधायक भी बहुत जल्द स्पीकर को अपनी चिट्ठी सौंपकर हमारे गुट में शामिल हो जाएंगे।

लोकसभा सांसदों की लिस्ट भी आई सामने

इस बगावत की आंच दिल्ली तक पूरी तरह फैल चुकी है। बुधवार को ही लोकसभा में बगावत करने वाले टीएमसी के 20 सांसदों की सूची भी सामने आ चुकी है। इस भारी टूट के बाद ममता बनर्जी के सामने अब पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन बचाने और दिल्ली में पार्टी के अस्तित्व को बचाए रखने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस ‘महा-बगावत’ पर ममता बनर्जी का अगला कदम क्या होता है।

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