नई दिल्ली। भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अंतरमहाद्वीपीय रेंज (Intercontinental Range) की मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने वाले अपने फेज-II मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का लगातार 3 सफल परीक्षण पूरा किया है।
इस ऐतिहासिक परीक्षण के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास अपनी खुद की ऑपरेशनल मिसाइल शील्ड है।
भारत अब अमेरिका, रूस, चीन और इजरायल के बाद दुनिया का 5वां ऐसा देश बन गया है जिसके पास यह अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक है।
यह रक्षा प्रणाली दुश्मन की 5,500 किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाली इंटरकॉन्टिनेंट बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) को पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर और बाहर (Endo and Exo-atmospheric) ट्रैक कर नष्ट कर सकती है।
BMD का पूरा नाम का पूरा नाम है Ballistic Missile Defence system, जिसे DRDO द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
रक्षा विशेषज्ञ इसे “BMD Elite Club” कहते हैं. इस क्लब में शामिल देश न केवल मिसाइल हमलों को रोक सकते हैं, बल्कि बहु-स्तरीय (Multi-Layered) रक्षा कवच भी विकसित कर चुके हैं। भारत की इस उपलब्धि ने चीन और पाकिस्तान दोनों की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है।
क्या होता है BMD सिस्टम?
मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम (Ballistic Missile Defence) ऐसी रक्षा प्रणाली है जो दुश्मन द्वारा छोड़ी गई बैलिस्टिक मिसाइल को उसके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर देती है. यह प्रणाली रडार, सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क और इंटरसेप्टर मिसाइलों के संयुक्त संचालन पर आधारित होती है।
BMD सिस्टम आमतौर पर दो चरणों में काम करता है। पहला, लंबी दूरी के रडार दुश्मन की मिसाइल को ट्रैक करते हैं। दूसरा, इंटरसेप्टर मिसाइलें उसे वायुमंडल के भीतर या बाहर जाकर नष्ट कर देती हैं। यही वजह है कि इसे किसी भी देश की सबसे जटिल रक्षा तकनीकों में गिना जाता है।
क्या होता है एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट?
एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल (ASBM) ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल होती है जो समुद्र में चल रहे युद्धपोतों, एयरक्राफ्ट कैरियर और नौसैनिक बेड़ों को निशाना बनाने के लिए विकसित की जाती है। सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत इन्हें चलते हुए लक्ष्य को ट्रैक और हिट करने के लिए डिजाइन किया जाता है।
एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट के दौरान मिसाइल की लक्ष्य पहचान, ट्रैकिंग, मिड-कोर्स गाइडेंस और अंतिम चरण में सटीक प्रहार क्षमता की जांच की जाती है. ऐसी तकनीक बहुत कम देशों के पास है क्योंकि समुद्र में गतिशील लक्ष्य को हिट करना अत्यंत जटिल माना जाता है।
BMD एलिट क्लब में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
दुनिया में केवल कुछ देशों ने प्रभावी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता विकसित की है। अभी इनमें अमेरिका, रूस, चीन, इजरायल और भारत का नाम शामिल है। शेष देशों में पास ये सिस्टम नहीं है। इनमें अमेरिका का GMD और THAAD, इजरायल का Arrow और David’s Sling, रूस का A-135 तथा चीन की स्वदेशी मिसाइल रक्षा प्रणाली प्रमुख उदाहरण हैं।
भारत इस ग्रुप में क्यों शामिल हुआ?
भारत ने पिछले दो दशकों में कई सफल इंटरसेप्टर परीक्षण किए हैं। पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD), एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD), AD-1 और AD-2 जैसी प्रणालियों ने भारत को ऐसी क्षमता प्रदान की है, जिससे वह मध्यम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक सकता है।
भारत में संपन्न हालिया सफल परीक्षणों ने यह साबित किया है कि भारत अब केवल एक मिसाइल शक्ति नहीं बल्कि मिसाइल रक्षा शक्ति भी बन चुका है। यही कारण है कि रक्षा विशेषज्ञ भारत को BMD एलिट क्लब का सदस्य मानते हैं।
भारत को इससे क्या फायदा होगा?
भारत के लिए यह क्षमता कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। सबसे पहला लाभ राष्ट्रीय सुरक्षा है। दुश्मन देशों की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच तैयार होता है।
दूसरा, यह भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Deterrence) को मजबूत करता है। यदि दुश्मन को पता हो कि उसकी मिसाइलें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले नष्ट की जा सकती हैं, तो उसका आक्रामक रुख कमजोर पड़ता है।
तीसरा, इससे रणनीतिक परिसंपत्तियों, बड़े शहरों, सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
भारत ने मल्टी-लेयर्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टमकी हैसियत कैसे हासिल की?
भारत की BMD प्रणाली बहु-स्तरीय रक्षा अवधारणा पर आधारित है। इसका मतलब है कि यदि पहली इंटरसेप्टर मिसाइल लक्ष्य को नष्ट नहीं कर पाती, तो दूसरी और तीसरी परत सक्रिय हो जाती है।
एक परत वायुमंडल के बाहर (Exo-Atmospheric) मिसाइल को रोकती है, जबकि दूसरी परत वायुमंडल के भीतर (Endo-Atmospheric) उसे नष्ट करने की क्षमता रखती है। AD-1 और AD-2 जैसे नए इंटरसेप्टर इस नेटवर्क को और अधिक मजबूत बना रहे हैं। इससे भारत एक व्यापक मिसाइल सुरक्षा कवच विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
DRDO की भूमिका क्या?
Defence Research and Development Organisation (DRDO) भारत की मिसाइल रक्षा परियोजना की रीढ़ रही है। DRDO ने स्वदेशी रडार, सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क और इंटरसेप्टर मिसाइलों का विकास किया। PAD, AAD, PDV, AD-1 और AD-2 जैसी प्रणालियां इसी संगठन की वर्षों की रिसर्च का परिणाम हैं।
DRDO ने विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करते हुए देश में अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया. संगठन ने निजी उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र और सशस्त्र बलों के साथ मिलकर ऐसी क्षमता तैयार की है जो भारत को दुनिया की अग्रणी मिसाइल रक्षा शक्तियों में शामिल करती है।
चीन और पाकिस्तान की टेंशन क्यों बढ़ी?
Pakistan और China दोनों ही बैलिस्टिक मिसाइलों को अपनी रणनीतिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। भारत की उन्नत BMD क्षमता उनके लिए चुनौती इसलिए बनती है क्योंकि इससे उनके मिसाइल हमलों की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
पाकिस्तान की रणनीति मुख्य रूप से मिसाइल और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता पर आधारित है। वहीं, चीन के पास लंबी दूरी की अत्याधुनिक मिसाइलें हैं। भारत के मल्टी-लेयर्ड मिसाइल डिफेंस नेटवर्क के मजबूत होने से दोनों देशों को अपनी मिसाइल तकनीक और रणनीति में नए बदलाव करने पड़ सकते हैं।
भारत के लिए इसका रणनीतिक संदेश क्या है?
BMD एलिट क्लब में भारत की मौजूदगी यह संकेत देती है कि देश अब केवल मिसाइल विकसित करने वाला राष्ट्र नहीं, बल्कि मिसाइलों को निष्क्रिय करने वाली उन्नत रक्षा तकनीक रखने वाली शक्ति भी बन चुका है. यह उपलब्धि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और रणनीतिक तैयारी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देती है।
भारतीय BMD सिस्टम की 5 सबसे बड़ी क्षमताएं
- 2,000-5,000 किमी रेंज की क्षमता
भारत का बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम मध्यम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक कर उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है. भविष्य में AD-2 इंटरसेप्टर के शामिल होने से इसकी क्षमता और बढ़ सकती है।
- दो-स्तरीय (Multi-Layered) सुरक्षा कवच
यह सिस्टम दो स्तरों पर काम करता है। पहली परत वायुमंडल के बाहर (Exo-Atmospheric) 50-150 किमी की ऊंचाई पर मिसाइल को इंटरसेप्ट करती है, जबकि दूसरी परत वायुमंडल के भीतर (Endo-Atmospheric) 15-30 किमी की ऊंचाई पर उसे नष्ट करने में सक्षम है।
- AD-1 और AD-2 जैसे उन्नत इंटरसेप्टर
AD-1 इंटरसेप्टर मध्यम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए विकसित किया गया है, जबकि AD-2 इंटरमीडिएट रेंज और भविष्य में इंटरकॉन्टिनेंटल श्रेणी की मिसाइलों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
- 1,500 KM से अधिक दूरी तक निगरानी करने वाला रडार नेटवर्क
भारत का स्वदेशी लॉन्ग रेंज ट्रैकिंग रडार (LRTR) 1,500 किलोमीटर से अधिक दूरी पर मिसाइलों का पता लगाने और उनकी गतिविधियों को ट्रैक करने में सक्षम है, जिससे समय रहते इंटरसेप्टर लॉन्च किए जा सकते हैं।
- एक साथ कई मिसाइलों को ट्रैक और नष्ट करने की क्षमता
BMD नेटवर्क एक ही समय में कई लक्ष्यों की पहचान, ट्रैकिंग और इंटरसेप्शन कर सकता है। यही क्षमता इसे दुनिया की उन्नत मल्टी-लेयर्ड मिसाइल डिफेंस प्रणालियों की श्रेणी में खड़ा करती है।






