छत्तीसगढ़

कोरिया में रेत माफिया का खूनी तांडव : पूर्व जनपद अध्यक्ष को कार में जिंदा जलाया, भाई समेत तीन की मौत; 4 गिरफ्तार

अंबिकापुर। कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र के नवगई गांव में रेत तस्करी और अवैध खनन के वर्चस्व को लेकर दो परिवारों के बीच चल रहा पुराना विवाद मंगलवार रात कत्लेआम में बदल गया। आबंटित रेत घाट के बजाय अवैध जगहों से रेत निकालने और गाड़ियों से होने वाली वसूली के विवाद में हुए इस खूनी संघर्ष में तीन लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई।

इस वारदात में सोनहत के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह 60 को उनकी फॉर्च्यूनर कार के अंदर जिंदा जला दिया गया। वहीं, जान बचाने के लिए कार की खिड़की तोड़कर बाहर निकले उनके सगे भाई नागेंद्र सिंह 60 और साथी वीरेंद्र सिंह 28 की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। घटना में मयंक और योगेंद्र गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज जारी है।

रेत के अवैध कारोबार पर एकाधिकार की जंग

पुलिस जांच के अनुसार, इस पूरे हत्याकांड की मुख्य वजह रेत के अवैध कारोबार पर अपना एकाधिकार जमाने की कोशिश थी। बैकुंठपुर महलपारा के  लल्ला सिंह के भाई नागेंद्र सिंह के बेटे ने नवगई रेत घाट का सरकारी ठेका लिया था। नियमों के मुताबिक रेत इसी आवंटित घाट से उठनी थी, लेकिन नवगई का रहने वाला मनोज त्रिपाठी परिवार इस घाट से रेत न लेकर आस-पास की अन्य जगहों से रेत की अवैध तस्करी और माइनिंग का काम करता था।

दूसरी ओर, ठेका पक्ष से लल्ला सिंह का भतीजा मयंक सिंह रेत ले जाने वाले इन अवैध वाहनों से रुपयों की वसूली करता था। इसी बात को लेकर दोनों परिवारों में अक्सर विवाद होता रहता था।

 दोपहर की मारपीट के बाद रात को रची मौत की साजिश

मंगलवार दोपहर को इसी रंजिश के चलते सोनहत रोड पर शिवघाट के पास लल्ला सिंह के भतीजे मयंक सिंह और मनोज त्रिपाठी के भाई निशांत के बीच जमकर मारपीट हुई थी। इसके तुरंत बाद त्रिपाठी परिवार ने सोनहत थाने में मयंक और उसके साथियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

दोपहर के इसी विवाद का बदला लेने और समझौता करने के इरादे से मंगलवार देर रात करीब 12 बजे लल्ला सिंह अपने भाई नागेंद्र, भतीजे मयंक, योगेंद्र और साथी वीरेंद्र के साथ दो अलग-अलग कारों में सवार होकर नवगई गांव पहुंचे थे। लेकिन वहां पहले से घात लगाकर बैठी त्रिपाठी परिवार और उनके करीबियों की हिंसक भीड़ ने लल्ला सिंह की गाड़ियों को घेर लिया और हमला कर दिया।

फॉरेंसिक जांच में हुआ खुलासा: शॉर्ट सर्किट नहीं, कार में लगाई गई थी आग

शुरुआत में घटनास्थल पर 11 केवी हाइटेंशन लाइन का बिजली खंभा भी टूटा मिला था, जिससे यह अंदेशा लगाया जा रहा था कि तार गिरने से शॉर्ट-सर्किट हुआ होगा। लेकिन फॉरेंसिक जांच के बाद पुलिस ने इस थ्योरी को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

जाँच में यह साफ हो गया है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से कार में आग लगाई थी। वीरेंद्र सिंह के गले पर गंभीर वार किए गए थे, जिससे अंबिकापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं 40 से 60 फीसदी तक झुलसे और बुरी तरह घायल नागेंद्र सिंह ने रायपुर रेफर किए जाने के बाद दम तोड़ दिया।

4 मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 5 अब भी फरार

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा रेंज के आईजी और कोरिया पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। कोरिया की एडिशनल एसपी सुरेशा चौबे ने बताया कि पुलिस ने मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी, अक्षत त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी और सत्यप्रकाश त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है। ये चारों आरोपी एक ही परिवार के हैं। घटना में शामिल अन्य 5 फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें SIT संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।

अधिकारी का बयान

फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट में यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि कार में सुनियोजित तरीके से आग लगाई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आगजनी का नामजद केस दर्ज किया गया है। 4 की गिरफ्तारी हो चुकी है, शेष 5 फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

दीपक झा, आईजी, सरगुजा रेंज

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