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अब मानसून सत्र में आ सकता है परिसीमन विधेयक :  दो तिहाई बहुमत से कितनी दूर NDA, राज्यसभा का भी जानें हाल

नई दिल्ली। संसद में विपक्षी खेमे में भगदड़ मची हुई है। पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों और विधायकों ने बागी होकर अलग गुट बना लिए। इसके बाद महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना का भी यही हाल हुआ। 9 में से 6 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय की बात कही है। इन सभी सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है। इससे केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को परिसीमन विधेयक को दोबारा पास कराने का मौका दिखने लगा है।

गौरतलब है कि सरकार ने इस परिसीमन विधेयक को महिला आरक्षण लागू करने से जोड़ा था। अप्रैल 2026 में लोकसभा में इस संविधान संशोधन विधेयक के गिरने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने कार्यकाल में पहली बार किसी संवैधानिक संशोधन पर शिकस्त का सामना करना पड़ा था। लेकिन अब विपक्ष के बिखराव ने सरकार की उम्मीदें फिर जगा दी हैं।

क्यों बदल रहे हैं संसद के समीकरण?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में बड़ा विस्फोट हुआ है। लोकसभा में चौथी सबसे बड़ी पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने एक अलग गुट बना लिया है। इस गुट ने नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में अपने विलय की घोषणा की है और वे एनडीए सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा राज्यसभा में भी टीएमसी के तीन सांसदों सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बड़ाइक ने इस्तीफा दे दिया है।

टीएमसी के बाद उद्धव ठाकरे गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना या एनडीए के पाले में जाने की अटकलें तेज हैं। इस डर से शिवसेना (UBT) ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि बिना उनका पक्ष सुने किसी भी संभावित विभाजन को मंजूरी न दी जाए।

वहीं, तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने द्रमुक (DMK) से अपना गठबंधन तोड़ लिया है। इस महीने की शुरुआत में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक में भी डीएमके शामिल नहीं हुई थी। इससे पहले राज्यसभा में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के 7 सांसद टूटकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

अप्रैल 2026 में सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से 54 वोट पीछे रह गई थी। सदन में मौजूद और मतदान करने वाले 528 सांसदों में से सरकार को केवल 298 वोट मिले थे, जबकि जरूरत 352 वोटों की थी। आपको बता दें कि लोकसभा की कुल 543 सीटों के हिसाब से दो-तिहाई बहुमत के लिए 362 का आंकड़ा चाहिए।

क्या कहते हैं लोकसभा के आंकड़े

वर्तमान में एनडीए की मौजूदा ताकत 293 सांसदों की है। दो तिहाई बहुमत के आंकड़े 69 सीटें दूर है। TMC के 20 बागी सांसदों के साथ यह संख्या 313 पर पहुंचती है। शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के जुड़ने से यह आंकड़ा 319 तक पहुंचता है। इसके बाद भी दो तिहाई बहुमत के लिए 33 सीटों की जरूरत रह जाएगी। संसद में अगर डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन मिल भी जाएगा तो एनडीए को 9 सीटों की और आवश्यक्ता होगी।

आपको बता दें कि अप्रैल में एनडीए को इस बिल पर वोटिंग के दौरान 298 वोट मिले थे। इस आंकड़े में टीएमसी के 20 और शिवसेना के 6 बागियों को जोड़ें, तो यह संख्या 324 पहुंचती है। यह दो-तिहाई बहुमत से 28 वोट दूर होगी। अगर सभी 22 डीएमके सांसद भी समर्थन दे दें तो बहुमत से 6 वोट दूर रह जाएगी। वाईएसआरसीपी (YSRCP) के 4 सांसदों, 7 निर्दलीयों और अन्य छोटे दलों की मदद से इसे पूरा किया जा सकता है।

DMK का समर्थन मिलना आसान नहीं

डीएमके हमेशा से इस परिसीमन विधेयक का सबसे मुखर विरोधी रही है। तमिलनाडु चुनावों से पहले डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने इस विधेयक की कॉपियां तक जला दी थीं और जनता से घरों पर काले झंडे फहराने की अपील की थी। दक्षिण भारतीय राज्यों की मुख्य चिंता यह है कि यदि परिसीमन को मौजूदा जनसंख्या के आधार पर किया गया तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है, उनकी लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी और उत्तर भारत की सीटें बढ़ जाएंगी। विधेयक में लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है।

क्या है बीच का रास्ता?

डीएमके के सांसद ए. राजा ने साफ किया है कि वे इस प्रारूप के खिलाफ हैं और सिर्फ इंडिया गठबंधन से बाहर होने का मतलब यह नहीं कि वे भाजपा के साथ चले जाएंगे। हालांकि, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने संकेत दिया है कि एनडीए सरकार जल्द ही इस विधेयक को एक नए संशोधन के साथ पेश करेगी जिसमें सभी राज्यों में आनुपातिक रूप से 50% सीटें बढ़ाने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है ताकि किसी राज्य को नुकसान न हो।

राज्यसभा में एनडीए की मजबूत स्थिति

लोकसभा के मुकाबले राज्यसभा में एनडीए दो तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच चुका है। राज्यसभा में भाजपा के पास अपने दम पर 114 सीटें हैं, जो उसका अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। विपक्षी कांग्रेस के पास केवल 30 सीटें हैं। 18 जून को झारखंड में राज्यसभा चुनाव में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की संभावित जीत से एनडीए का आंकड़ा 148 से बढ़कर 152 हो सकता है।

पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसदों के इस्तीफे से खाली हुई 3 सीटों पर भाजपा की जीत तय मानी जा रही है, जिससे एनडीए का आंकड़ा 155 पहुंच जाएगा। दो-तिहाई बहुमत से सिर्फ 8 सीटें दूर होगा। दूसरी तरफ, डीएमके के बाहर होने और आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों के टूटने के बाद विपक्षी इंडिया गठबंधन राज्यसभा में घटकर महज 63 सीटों पर सिमट गया है।

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