छत्तीसगढ़

नकटी में भारी विरोध और आंसुओं के बीच चला बुलडोजर : सुबह 4 से शाम 5 बजे तक मलबे में तब्दील हुए 60 आशियाने

रायपुर। राजधानी से सटे नकटी गांव में सोमवार को प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की अब तक की सबसे बड़ी और कड़क कार्रवाई की। तड़के 4 बजे से शुरू हुआ यह घटनाक्रम शाम 5 बजे तक चला, जिसमें भारी विरोध, झड़प और पत्थरबाजी के बीच करीब 60 मकानों सहित कुल 77 अवैध कब्जों को ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान प्रभावित परिवारों के घरों में चूल्हा तक नहीं जला। रोते-बिलखते ग्रामीणों ने अधिकारियों से गुहार लगाई, चक्काजाम की कोशिश की, लेकिन भारी पुलिस बल के आगे उनकी एक न चली।

छावनी में बदला गांव, ड्रोन से रखी गई नजर

प्रशासन ने कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पुख्ता रणनीति बनाई थी। बाहरी तत्वों और राजनीतिक संगठनों को गांव में प्रवेश करने से रोकने के लिए तीनों मुख्य रास्तों पर थ्री-लेयर (तीन स्तरीय) बैरिकेडिंग की गई थी। माना एयरपोर्ट मार्ग से लेकर मुख्य बस्ती तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था। कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई गई और आसमान से ड्रोन के जरिए निगरानी रखी गई। बेघर हुए लोगों के सामान को सुरक्षित पहुंचाने के लिए टीम प्रहरी, कोटवार और नगर निगम के काऊ कैचर वाहनों की मदद ली गई।

जब सरकारी सुविधाएं और पीएम आवास मिले, तो यह अतिक्रमण कैसे

प्रशासनिक अधिकारियों का साफ कहना है कि लगभग 9 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर यह 77 अवैध कब्जे किए गए थे, जिन्हें हटाना जरूरी था। दूसरी ओर, प्रभावित ग्रामीण भारती साहू, सोनी यादव और मुकुंद साहू ने प्रशासन के दावों पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि वे यहां दशकों से रह रहे हैं। जब यह जमीन अवैध थी, तो सरकार ने यहां बिजली-पानी की सुविधाएं क्यों दीं? यही नहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यहां बकायदा 22 पक्के मकान बने हुए थे और 5 नए हितग्राहियों के नाम भी स्वीकृत हो चुके थे। ऐसे में अचानक इसे अवैध घोषित कर देना गले नहीं उतरता।

तड़के से शाम तक, घंटे-दर-घंटे यूं चला बुलडोजर और विरोध का घटनाक्रम

गांव में सुबह की पहली किरण के साथ ही तनाव का माहौल बन गया था। पूरे दिन चले इस घटनाक्रम में –

सुबह 4 बजे : कार्रवाई के डर से ग्रामीण रातभर सोए नहीं और पीपल पेड़ के नीचे धरने पर बैठे रहे।

सुबह 6 बजे : प्रशासन की गाड़ियां, कई जेसीबी मशीनें और भारी पुलिस बल प्रभावित क्षेत्र में दाखिल हुआ।

सुबह 7 बजे : ग्रामीणों का आक्रोश फूटा। महिलाओं और पुरुषों ने जेसीबी के आगे बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस बीच कुछ लोगों ने गुस्से में जेसीबी चालकों पर पथराव भी किया।

सुबह 8 बजे : पुलिस ने घेराबंदी कर प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया और पहले मकान पर बुलडोजर चला दिया।

सुबह 9 बजे : मनवा यादव के घर से रोती-बिलखती महिलाओं को महिला पुलिस ने बाहर निकाला और तोड़फोड़ शुरू की।

सुबह 9.30 बजे : विरोध का अनोखा रूप दिखा। भूषण नाम का युवक अपने घर की छत पर हाथ में ईंटें लेकर खड़ा हो गया, जिसे पुलिस ने समझा-बुझाकर नीचे उतारा।

सुबह 10 बजे : लाचारी के बीच साहू परिवार अपने नए बने पक्के मकान के दरवाजे और खिड़कियां खुद ही हथौड़ी से उखाड़कर बचाने में जुट गया।

दोपहर 12 बजे : बेघर हो चुके परिवारों के घरेलू सामान (बिस्तर, बर्तन, राशन) को नगर निगम के काऊ कैचर वाहनों में लादकर नवा रायपुर भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई।

दोपहर 12.30 बजे : कार्रवाई के बीच एक बार फिर माहौल गरमाया और पत्थरबाजी हुई, जिसे पुलिस ने तुरंत नियंत्रित किया।

दोपहर 1 बजे : तोड़फोड़ में लगे कर्मचारियों के लिए भोजन की व्यवस्था हुई, लेकिन अपने आशियाने को उजड़ता देख डरे-सहमे विस्थापित परिवारों के मासूम बच्चे पूरे समय भूखे-प्यासे तड़पते रहे।

शाम 4 बजे : कार्रवाई अंतिम चरण में पहुंची। पुलिस का कुछ बल वापस लौटने लगा, जबकि लोग मलबे के ढेर से अपनी जरूरत और काम का सामान बटोरते दिखे।

शाम 5 बजे : मलबे और धूल के गुबार के बीच प्रशासन ने कार्रवाई पूरी होने की घोषणा की। विरोध के स्वर भी अब मायूसी में बदल चुके थे।

नवा रायपुर के EWS मकानों में अस्थायी पुनर्वास

कार्रवाई खत्म होने के बाद प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सभी बेघर और प्रभावित परिवारों को तत्काल आसरा देने की बात कही है। इन सभी विस्थापितों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 में स्थित ईडब्ल्यूएस  आवासों में अस्थायी रूप से शिफ्ट कर दिया गया है, जहां उनके रहने और खाने-पीने का प्रबंध किया जा रहा है।

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