सुहेला। मानसून की पहली ही बारिश ने शिक्षा विभाग की तैयारियों की पोल खोल दी। शासकीय नवीन प्राथमिक शाला, सुहेला में बारिश शुरू होते ही एक कक्षा और बरामदे की छत से पानी टपकने लगा, जिससे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो गई। स्थिति ऐसी बन गई कि लगभग 73 विद्यार्थियों वाली पांचों कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ रही है। टपकती छत के बीच शिक्षक और बच्चे जैसे-तैसे शिक्षण कार्य संचालित करने को मजबूर हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह समस्या नई नहीं है। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार पिछले दो-तीन वर्षों से प्रत्येक बरसात में यही स्थिति बनती आ रही है। छत की मरम्मत के लिए कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। नतीजतन इस वर्ष भी पहली बारिश के साथ बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने लगी।
विद्यालय में कुल तीन कमरे हैं, जिनमें से एक कक्षा और बरामदे की छत से लगातार पानी रिस रहा है। ऐसे में सभी विद्यार्थियों को एक ही कक्ष में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। इससे न केवल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
विद्यालय परिसर में स्थित अतिरिक्त भवन भी पिछले लगभग तीन वर्षों से जर्जर अवस्था में खड़ा है। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार इस भवन को डिस्मैंटल (ध्वस्त) किए जाने के लिए लगातार प्रस्ताव एवं आवेदन भेजे जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए उसमें कक्षाएं संचालित करना बंद कर दिया गया है। अब जिस भवन में पढ़ाई हो रही है, उसकी छत भी बारिश में जवाब देने लगी है।
सरपंच और पंचों ने शीघ्र मरम्मत की मांग की
बार-बार जानकारी और प्रस्तावों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर सोमवार को विद्यालय की प्रधान पाठिका ने ग्राम के उपसरपंच देवाधृतरलहरे एवं पंच को विद्यालय बुलाकर टपकती छत की स्थिति दिखाई और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की जानकारी देते हुए शीघ्र मरम्मत की मांग की।
विभाग को जानकारी भेजी गई है : प्राचार्य
प्रधान पाठक जामवंती गेंडे ने बताया कि छत की मरम्मत के लिए विभाग को जानकारी भेजी गई थी। बरसात के दौरान छत से पानी टपकने के कारण विद्यार्थियों को बैठने और पढ़ाई करने में भारी परेशानी होती है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी मरम्मत कार्य नहीं कराया गया।
निर्माण कराना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं
इस संबंध में संकुल समन्वयक शंभू ने कहा, मेरा कार्य केवल विद्यालय से प्राप्त जानकारी एवं आवेदन को विकासखंड शिक्षा अधिकारी तक पहुंचाना है। भवन की मरम्मत या निर्माण कराना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
जर्जर भवन को डिस्मैंटल करने प्रस्ताव भेजा गया
विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने बताया कि जर्जर भवन को डिस्मैंटल करने के लिए प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है, जिस पर अभी निर्णय होना बाकी है। उन्होंने कहा, ऐसी प्रक्रियाओं में समय लगता है। जहां तक कक्षाओं में पानी टपकने का सवाल है, वहां आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य जल्द कराया जाएगा।”






